Monday, 28 January 2013

आज़ाद है हम जो



आज़ाद है हम जो युँ आज़ाद नहीं है, 
बर्बाद है क्युं आबाद नहीं है ?

आज़ाद है नेता यहाँ पैसे कमाने को,
और बेच के कस्बा-ओ-मुल्क सोना चबाने को,
भिखमंगे सारे वोट माँगे सर झुका के ये,
मौके पे हाथी दाँत कुछ कुछ दिखाने को,
है सूँढ इनका लम्बा सिर्फ पीने के लिये,
बरसात के मौसम मे मेंढक आँसु बहाने को l

हैवानियत इन्सानियत मे फर्क अब नहीं,
हैवान है हैवान इन्सान इन्सान है नहीं l

हर शख्स है परेशान यहाँ रोटी कमाने को,
हर औरत यहाँ अपनी इज़्ज़त बचाने को l

सौ चक्करे सौ नोट काफ़ी नहीं है अब,
दफ़्तर मे दफ़्न फ़ाइले ज़िन्दा कराने को l

जीना नहीं आसान इस मुल्क मे मगर,
हम कोस्ते नहीं फिर भी ज़माने को l

रहबर नहीं है जो, तो राह क्या करे,
चलते है हम मगर तलवे जलाने को l

सुनके मेरी सदा पर्दे मे न सिसक,
ले हाथ मे मशाल दुनिया हिलाने को l

कूवत मे जो तेरे वो करके तु दिखा,
है वक़्त अब नहीं तबीयत सुनाने कोl