मुझे फिर से फुलवारी दिखा देना
कांटो वाली
कांटे छुपाते हुए,
क्यूंकि मै तो
गूंगा हूँ,
बहरा हूँ,
अँधा हूँ
बिलकुल गाँधी जी के विपरीत वाला |
चला देना उस बग़ीचे की ओर
जिसके पत्ते और बीज की दुहाई देकर
कटवाओगे मुझसे
उसके ही जड़ |
क्यूंकि तुमने पढ़ रखे है
व्यवस्थित अराजकता के सारे सिद्धांत
और खुद को एलीट क्लास का कहते हो
और हमें आम आदमी |
अगर तुम्हे ऐसा लगता है,
तो इस ग़लतफ़हमी से बाहर निकलो
क्यूंकि हमें दिखने लगा है
सब कुछ साफ़ साफ़ |
--असीर
कांटो वाली
कांटे छुपाते हुए,
क्यूंकि मै तो
गूंगा हूँ,
बहरा हूँ,
अँधा हूँ
बिलकुल गाँधी जी के विपरीत वाला |
चला देना उस बग़ीचे की ओर
जिसके पत्ते और बीज की दुहाई देकर
कटवाओगे मुझसे
उसके ही जड़ |
क्यूंकि तुमने पढ़ रखे है
व्यवस्थित अराजकता के सारे सिद्धांत
और खुद को एलीट क्लास का कहते हो
और हमें आम आदमी |
अगर तुम्हे ऐसा लगता है,
तो इस ग़लतफ़हमी से बाहर निकलो
क्यूंकि हमें दिखने लगा है
सब कुछ साफ़ साफ़ |
--असीर